क्या कहूँ जब समर्पित भाव है
लिखूं कुछ अच्छा सा , नहीं अभाव है
शब्दों का , चयन करूं किसके लिए
भावों का , यही अभाव है
भाव जब अभिबयक्ति लोक में जाता
लेकर आता कुछ नया चाव है
अभिब्यक्ति जब ब्यक्तित्व से मिलती
ब्यक्ति के ब्यक्तित्व में आ जाता नया ताव है
कौन जाने कौन से ब्यक्तित्व में क्या छिपा
किसका कौन माझी कौन नाव है
शब्द से चालित इस दुनियां में
शब्द ही मरहम , शब्द ही घाव है
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