बुधवार, 19 जनवरी 2011

हुक्का क्यों गुड गुड करता
कहता कि अंतस में भर लो
गुड कि दूनी गुडगुड मिठास
ये दुनिया एक चौपाल ,
सभी से करो एक ब्यावोहार
सभी का चाहो वैरी गुड
भर दो दुनया में सुविचार
बचन में गुड सा भरो मिठास
हुक्का सबसे प्रेम जताता चौपालों में ,
 प्रेमी जनो कि नित्य नई महफिले सजाता ,,

मंगलवार, 18 जनवरी 2011

हाय ये शब्द बेचारे
करते रहते अभिब्य्ति ब्यक्त फिर भी जाते हरदम  मारे
जब उमड़ा प्रेम लपेट दिया जब गुस्सा आई दे मारे
माँगा तो इनसे ही माँगा ,जब दिया इन्ही का साथ लिया
निज पीड़ा को इनसे बांटा ,निज सुख को इनसे रूप दिया
पर आज पड़े है देहरी पर कुचले से अनजाने से
लो देख आईना सब कोई , ले लो सीख ज़माने से
शब्दों से चलती  है दुनिया शब्दों से भगवान  चले
शब्दों से प्रेम उमड़ता है शब्दों से अरमा मचले
शब्दों से मिलता घाव , शब्दों से मरहम बनता
शब्दों से शब्दों का युद्ध , प्रेम, कवि की रसमय कविता बनता
आज फिर मन ने विद्रोह किया
जब जिन्दगी छीन लेने का माननीयों ने प्रयत्न किया
कहते  हैं मंहगाई बढ़ गयी अंतररास्ट्रीय कारन बताते है
देश में पैदा होने वाली चीज को विदेशी बनाते है 
पर मेरे हिसाब से मंहगाई नहीं बढ़ी बढ़ाई गयी 
जनता को लूटने की योजना बनाई गयी 
देश के विकाश का ९०% धन पहले से खा लिया जाता है 
कम पड़ा तो पेट की राह देखी , अनाज मंहगा कर दिया 
बेचारी  जनता  को लूट लिया

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सोमवार, 17 जनवरी 2011

भ्रम

जब मिला ना कोई सहज भाव भ्रम को ही अपना मान लिया
माना कि ,क ; है कहकर सभी प्रश्नों को हल किया 
पर हाय  नियति की चाले वह उत्तर ही फिर प्रश्न बना
फिर माना भ्रम  क है , फिर से उत्तर को निकाल लिया
पर ये क्या  फिर से वही हल , प्रश्न बनकर हुआ खड़ा
मै हल करता वह प्रश्न  बनता ,बस यही सिलसिला सुरू हुआ
हूँ लगा इसी में आजतलक वह प्रश्न नहीं हुआ पूरा
लगता है इस जनम में इस भ्रम का हल रहेगा,
अधूरा ....बस अधूरा .....
   

मन बोल उठा

मन बोल उठा सुनकर पुकार
कवि ऋणी नहीं अपवादों का
जो करते हर फन में सुराग
मन ब्यथित हुआ अंतर स्वर से
बह गए अश्रु बन शब्द राग
काली गहराती रातों में जब
निद्रा ने आगोश भरा , बिरहिन की सूनी सेजों पे
जब अंगारों ने नृत्य किया , बिरहिन के आंशू बरस परे ,
तब कवि जी ने निज कविता से भावों की  मधुर बरसात किया
उस एकाकी सूनी रैना में बरसा ,कविता से  रस दुलार ........

सोमवार, 10 जनवरी 2011

इस शहर का इंसान है डरा हुआ
अपनों से अपने प्रति बिम्ब से
कुछ शुभ कर्म नहीं हो पाता
शत्रु बहुत है पाले ,ऐसे में अपने को
करता हनुमान जी के हवाले
हे बरंगबली तोड़ दो दुश्मन की .......
मित्रो कुछ शुभ कर्म  कीजे
केवल बजरंगी को ही नहीं
राम को भी भज लीजे 

रविवार, 9 जनवरी 2011

बधाई  हो पलाश ,
राज मुकुट बन गए देश के
हो  गए सबसे खास
  तुम अति सुंदर , तुम अति कोमल
शुगना की चोंच से लाल
हैं पांख तुम्हारी रूपवती के होंठ
ज्यों डोरे पड़े रूपसी  आँख
शुग रीझ रीझ , चलि जात
निज टोंट लाल लखि , रूप समाने
सहज लरत निज  जाति
प्यारे प्यारे सुकोमल सुन्दर गात
मन अरझी रह्यो सुन्दरता में
ताते पायो ::राज मुकुट बिलाश ""

          

सोमवार, 3 जनवरी 2011

नया साल

भर गयी झोली शुभ सन्देश आया
नया साल नया साल नया साल आया
शुक्रिया नए साल में अभिनन्दन का
प्रेम की झोली लिए ;यशोदा का लाल आया
बांसुरी बज रही नए साल की कुंजो में
नया साल सबके लिए नवल रस रंग लाया
नव वर्ष की शुभकामनायें और अपनों की दुआएं
शुखद अहसास लेकर बह रही ठंढी हवाएं
कहना अपने सुहृद जनो से  :: very very happy new year::
मीठी मीठी वाणी का आओ उपहार लुटाएं
सर्वे भवन्तु सुखिना का मंत्र लेकर
 मित्रता की बगिया में प्रेम का फूल खिलाएं
हम तुम्हारे हैं तुम्हारे ही रहेंगे मित्रो
आओ सब मिलकर :शुभ मंगलम का मंत्र जगाएं