मंगलवार, 18 जनवरी 2011

आज फिर मन ने विद्रोह किया
जब जिन्दगी छीन लेने का माननीयों ने प्रयत्न किया
कहते  हैं मंहगाई बढ़ गयी अंतररास्ट्रीय कारन बताते है
देश में पैदा होने वाली चीज को विदेशी बनाते है 
पर मेरे हिसाब से मंहगाई नहीं बढ़ी बढ़ाई गयी 
जनता को लूटने की योजना बनाई गयी 
देश के विकाश का ९०% धन पहले से खा लिया जाता है 
कम पड़ा तो पेट की राह देखी , अनाज मंहगा कर दिया 
बेचारी  जनता  को लूट लिया

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