आज फिर मन ने विद्रोह किया
जब जिन्दगी छीन लेने का माननीयों ने प्रयत्न किया
कहते हैं मंहगाई बढ़ गयी अंतररास्ट्रीय कारन बताते है
देश में पैदा होने वाली चीज को विदेशी बनाते है
पर मेरे हिसाब से मंहगाई नहीं बढ़ी बढ़ाई गयी
जनता को लूटने की योजना बनाई गयी
देश के विकाश का ९०% धन पहले से खा लिया जाता है
कम पड़ा तो पेट की राह देखी , अनाज मंहगा कर दिया
बेचारी जनता को लूट लिया
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