सुनकर तुलसी की कथा बन गए तुलसी दास
ब्रिंदाजी के प्रेम में विष्णू भये उदास
सकल सृष्टि को छोड़कर भये प्रेम में लीन
सगरी माया की गति लई प्रेम ने छीन
परम मनोहर रूप तजि बनि गए सालिग्राम
बिनु तुलसी (ब्रिंदा ) के कछु नहीं लागे प्रिय घनश्याम
परम तपस्वनी त्यागिनी रत्नावली ललाम
मोह पास से अलग करि दे दिया संग घनशयाम
ब्रिंदाजी के प्रेम में विष्णू भये उदास
सकल सृष्टि को छोड़कर भये प्रेम में लीन
सगरी माया की गति लई प्रेम ने छीन
परम मनोहर रूप तजि बनि गए सालिग्राम
बिनु तुलसी (ब्रिंदा ) के कछु नहीं लागे प्रिय घनश्याम
परम तपस्वनी त्यागिनी रत्नावली ललाम
मोह पास से अलग करि दे दिया संग घनशयाम
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