मंगलवार, 4 दिसंबर 2012

सुनकर तुलसी की कथा बन गए तुलसी दास
ब्रिंदाजी के प्रेम में विष्णू भये उदास
सकल सृष्टि को छोड़कर भये प्रेम में लीन
सगरी  माया की गति लई प्रेम ने छीन
परम मनोहर रूप तजि बनि गए सालिग्राम
बिनु तुलसी (ब्रिंदा  ) के कछु नहीं लागे प्रिय घनश्याम
परम तपस्वनी त्यागिनी रत्नावली ललाम
मोह पास से अलग  करि   दे दिया संग घनशयाम 

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